कवर्धा : जिले की राजनीती में चमत्कारिक नेतृत्व के धनी, करीआंमा बाँध को श्रम दान से बनवाने वाले ,आदिवासियों दलितों ,पिछडो और वंचित वर्ग के दिलो में राज करने वाले लोकप्रिय जननेता अय्यूब खान का निधन आज सुबह 11 बजे राजधानी रायपुर में हो गया है ,विगत दिनों पारिवारिक विवाद के चलते उनके चचेरे भाई के पुत्र द्वारा जहर बुझे कटार से प्राण घातक हमला कर दिया गया था विगत 14 दिनों से उनका इलाज रामकृष्ण हॉस्पिटल में चल रहा था। इलाज के दौरान आज उनकी मौत हो गई।

क्या था विवाद जिससे गई जान ?

इस संबंध में बताया जा रहा है कि मृतक अय्यूब खान का चचेरा भाई इस्माइल से इस बात पर विवाद हो गया था कि कचरा क्यों साफ़ कर रहे हो ,इस विवाद पर उनके यहाँ कर रहे गूंगे नौकर से विवाद हो गया। इस पर अय्यूब खान द्वारा मना किया गया तो उस पर जानलेवा हमला कर दिया जिससे उसे चोट आई थी मामले में पुलिस ने कार्यवाही करते हुए पिता पुत्र को जेल भेज दिया था। जेल से जमानत पर छूटते ही इस्माइल के पुत्र द्वारा कब्रिस्तान में जहर बुझे कटार से ताबड़तोड़ हमला कर दिया गया। उन्हें तत्काल हॉस्पिटल पहुँचाया गया जहां से रायपुर रिफर कर दिया गया था। 14 दिन तक क्रिटिकल आई सी यु में पांच विशेषज्ञ चिकित्स्कों की देखरेख में इलाज चल रहा था किन्तु उसे बचाया नहीं जा सका। हमलावर को रायपुर से गिरफ्तार किया जा चूका है उसके पिता इस्माइल भी गिरफ्तार हो चूका है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

गरीब ,वंचित ,दलित आदिवासियों के दिलो में चलता था राज

मृतक अय्यूब खान जिले के उन गिने चुने नेताओ में से है जो गरीबो आदिवासियों ,दलितों एवं पिछड़ा वर्ग के मसीहा के रूप में जाने जाते है। जिला परिवहन अधिकारी गनी खान और पूर्व पार्षद मुराद खान के छोटे भाई मृतक अय्यूब खान निहायत ही खुशमिजाज और सेवाभावी प्रवृत्ति के थे अपनी लोकप्रियता के चलते वे रेंगाखार के सरपंच भी रह चुके है। उनकी मौत की खबर से उनके पैतृक ग्राम रेंगाखार सहित क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।

मृतक अय्यूब खान के नेतृत्व में श्रमदान से हुआ है करि आमा बांध का निर्माण

मृतक अय्यूब खान ने जन कल्याण की राजनीती की है ,एक समय था जब समाचार पत्रों की सुर्खिया बने रहे। उनके ही नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में बैगा आदिवासियों ने करि आमा बाँध का निर्माण श्रमदान करके बनाया था उस समय शासन और प्रशासन द्वारा रूकावट डालने पर क्षेत्र की जनता उनके साथ चट्टान की तरह खाड़ी हो गया व्यापक जन समर्थन के चलते उनकी जो छवि बानी है उसका दूसरा उदाहरण नहीं मिलता। आज करि आमा बांध से हजारो किसानो की भूमि सिंचित हो रही है उनके लिए अय्यूब खान मसीहा ही है।

हजारो बैगाओं आदिवासियों के साथ राजधानी तक पैदल यात्रा

आदिवासियों बैगाओं के नायक के रूप में ख्यात अय्यूब खान ने बैगाओं के अधिकार के लिए हजारो बैगा आदिवासियों के साथ पद यात्रा करते हुए राजधानी पहुंचे थे उनकी जीवटता के आगे शासन को झुकना पड़ा था। उनकी लोक प्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके एक इशारे पर आदिवासी बैगा पद यात्रा करते है राजधानी तक पहुंचे। उनकी मौत की खबर से दलित -आदिवासियों को गहरा आघात लगा है।

कल 11 बजे होगा सुपुर्दे खाक

मृतक अय्यूब खान के भतीजे नवभारत के ब्यूरो चीफ ताहिर खान ने बताया कि उनकी मौत से पूरा परिवार सदमे में है। उनके इष्ट मित्र और समर्थको में भी शोक की लहर है। उनका अंतिम संस्कार ग्राम रेंगाखार के कब्रिस्तान में होगा जहां उन्हें सुपुर्दे खाक किया जायेगा।

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