भारत-पाक के बीच तनाव अपने चरम सीमा पर है।  टीवी चैनल्स, वेबसाइट्‍स और सोशल मीडिया  फेसबुक, ट्विटर सहित कई प्रतिष्ठित वेबसाइटों पर इस मुद्दे पर चलाए गए कई  बहस में देशवासियो का मत  है कि चाहे परमाणु युद्ध हो जाए लेकिन इस बार आर-पार की लड़ाई करके पाकिस्तान को सबक सिखाया जाना  जरुरी है । रक्षा विशेषज्ञों द्वारा इस बात की  आशंका जताई जा रही है कि यदि भारत  पाकिस्तान पर कोई कठोर सैनिक कार्यवाई करता है तो यह पूर्णकालिक युद्ध का रूप ले सकती है। इसका अंत एक भयानक परमाणु युद्ध हो सकता है।
देश प्रेम तो ठीक है पर युद्धोन्माद तो किसी भी हाल में  ठीक  नहीं है  युद्ध के बारे में विचार रखने से पहले  जान लिया जाए कि आज के जमाने में कहीं भी होने वाले युद्ध अथवा परमाणु युद्ध का परिणाम कितना भयानक हो सकता है । गौरतलब है कि कोई भी राष्ट्र  यदि युद्ध करता है तो उसे आर्थिक, आंतरिक सुरक्षा, खाद्यान-गैस-तेल भंडारण, अतंरराष्ट्रीय कूटनीति सहित कई मोर्चे पर इसकी तैयारी रखनी होती है।
इसके अलावा किसी भी लोकतांत्रिक देश में युद्ध तत्कालीन सरकार और विपक्ष के बीच कई तनाव पैदा कर सकती है क्योंकि युद्ध के समय नागरिक अधिकारों के हनन के आरोप लगते हैं, जिसका परिणाम सैन्य विद्रोह, गृहयुद्ध अथवा देश में अशांति-अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
बहरहाल, हम बात करते हैं कि यदि भारत-पाकिस्तान में परमाणु युद्ध हुआ तो उसके नतीजे क्या हो सकते हैं। चूंकि भारत की नीति ‘पहले परमाणु हथियारों का उपयोग न करने’ की है तो तय है कि पहला परमाणु हमला पाकिस्तान ही करेगा। डर है कि इसका निशाना दिल्ली, मुंबई जैसे महानगर या चंडीगढ़, मेरठ, आगरा जैसी कोई सैन्य महत्व की जगह होगी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पाकिस्तान के पास भारत से अधिक परमाणु आयुध है जिनमें ‘डर्टी बम’ अत्यधिक खतरनाक रेडीयोधर्मी पदार्थ और आवणिक प्रक्षेपास्त्र होता है, भी शामिल है। इसके प्रयोग से लगभग 12 करोड़ लोग तत्काल प्रभावित हो सकते हैं।

फिर भी मान लिजिए परमाणु युद्ध हो ही गया तो इसका परिणाम क्या होंगे:

 पहला प्रभाव : जिस भी जगह आणविक/परमाणु विस्फोट होगा उस क्षेत्र में तीक्ष्ण चमक के साथ भयानक आग का गोला उठेगा जो कई मील तक सबकुछ जलाकर भस्म कर देगा। हालांकि यह परमाणु प्रक्षेपास्त्र की क्षमता पर निर्भर होगा। आणविक विस्फोट से उत्पन्न होने वाली चमक इतनी तेज होगी कि उससे लोग अंधे हो सकते हैं। इससे उठने वाला आग का गोला वातावरण की सारी वायु खींचकर कई मीलों तक वातावरण को वायुशून्य कर देगा। इससे प्रघातीय तरंगे उत्पन्न होंगी जो आसपास की इमारतों और अन्य वस्तुओं के परखच्चे उड़ाकर उन्हें नष्ट कर देंगी। इसके संपर्क में आने वाले इंसानों, प्राणियों की मृत्यु विदारक ढंग से होगी, वे जीवित ही अंदर से जल उठेंगे, भीषण तपिश से उनकी हड्डियां तक गल जाएंगे।
यदि परमाणु आयुध 6 मेगाटन से अधिक हुआ तो इसका परिणाम अत्यंत विनाशकारी होगा। यह समूचे शहर या प्रांत के वातावरण, वनस्पति तथा पारिस्थिति तंत्र को नष्ट कर उस क्षेत्र को जीवनविहीन बना देगा।
दूसरा प्रभाव : परमाणु विस्फोट से निकलने वाला कार्बन से बना बादल थोड़े ही समय में आघात क्षेत्र अलावा अत्यंत बड़े क्षेत्र में फैल सूर्यकिरणों को पृथ्वी पर आने से रोकेगा। इस काले-घने बादल से होने वाली अम्ल वर्षा से लाखों लोग मारे जाएंगे। वैज्ञानिकों के अनुसार इस बादल को छंटने में कई साल लगते हैं और इस प्रक्रिया में इससे निरंतर अम्लवर्षा होती है जिसका परिणाम अत्यंत विपदाकारी होता है।
इसका एक भयावह परिणाम मौसमी बदलाव और वैश्विक नमी में कमी, जिससे कम वर्षा और भीषण तूफानों का निर्माण होगा।
तीसरा प्रभाव : माना जा रहा है कि परमाणु विस्फोट से ओजोन परत में भारी नुकसान होगा। कार्बन से बने बादल धरती की कुल 25-40 से लेकर 70 प्रतिशत ओजोन परत को नष्ट कर देंगे जिसके पश्चात अंतरिक्ष से आनी वाली पराबैंगनी किरणों से मानवजाति और वनस्पति के अस्तित्व पर गंभीर परिणाम होंगे। इस परिवर्तन से विश्व में अम्लीय वर्षा और धूलभरे तूफानों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि होगी। (उपरोक्त तीनों में संदर्भ : आईएनपीटी, आफ्टर इफेक्ट्स ऑफ न्यूक्लियर वॉर इन अरबन पॉपुलेशन) 
उल्लेखनीय है कि 1930 के दशक में अमेरिका के टैक्सास और एरिजोना में धूलभरे तूफानों ने इन प्रांतों की फसलों को तबाह कर दिया था जिसके बाद अमेरिका में महान आर्थिक मंदी छा गई थी। कहा जाता है द्वितीय महायुद्ध के एक कारणों में यह भी था।
चौथा परिणाम : परमाणू युद्ध के पश्चात हुए व्यापक विध्वंस और जनहानि के बाद सरकार को फिर से आर्थिक, सामाजिक ढांचा खड़ा करने में दशकों लग जाएंगे। बेरोजगारी, गरीबी, भुखमरी से अपराध और जातीय संघर्ष बढ़ेंगे, जिससे आंतरिक सुरक्षा और अन्य समस्याएं खड़ी हो जाएंगी।
पांचवा और सबसे भयानक परिणाम : माना जाता है कि आर्थिक हानि को सहा जा सकता है और उसे आगे चलकर लाभ में भी बदला जा सकता है, लेकिन इस युद्ध में जो अकल्पनीय जनहानि होगी उसका अनुमान लगाना भी कठिन है। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार यदि भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध होता है तो 1.5 करोड़ लोग तत्काल अपनी जान गंवा देंगे और अगले 20 वर्षों तक इसके जानलेवा परिणाम करोड़ों अन्य जानें लेंगे।
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