जासूसी किसी देश की सरकार, पॉलिटिकल पार्टी, कॉरपोरेट हाउस, परिवारों और एक खास व्यक्ति तक की हो सकती है। पहले पर्सनल छान-बीन करना जासूसी का तरीका होता था।  लेकिन समय के साथ-साथ टेक्नोलॉजी बड़ी को मार्केट में नए-नए जासूसी उपकरण आ गए… अब फोन या मोबाइल टेप या हैक करना, इंटरनेट हैक कर दस्तावेज गायब चुराना(जूलियन असांजे ने किया था), आसमान से कैमरों के जरिए, कहीं सीसीटीवी लगाकर, इसके अलावा, घड़ी, टाई, पेन, बटन में कैमरे छिपा कर जासूसी की जाती है। जासूसी हजारों सालों से ही राज्य और सरकार का हथियार रही है। भारत में जासूसी के बारे मेंशुरुआती जानकारी मनुस्मृति और कौटिल्य के अर्थशास्त्र में मिलती है। वर्तमान समय में राजनीतिक कारणों से देश के अंदर और बाहर गुप्तचरों का इस्तेमाल किया जाता है।

  • पिछले दो विश्वयुद्धों में, विशेषकर द्वितीय विश्वयुद्ध में जासूसी को जरूरी हथियार बनाया गया। सैनिक अड्डों, हथियारों की जगह और कारखाने, सैनिक योजनाओं और अभियानों की पूर्वसूचना के लिए एक देश, दूसरे देश में जासूस भेजता था। इन एजेंटों में महिलाएँ भी होती थीं। ये जासूस या एजेंट दुश्मन देश के अधिकारियों और राजनेताओं से दोस्ती  करके गोपनीय सूचनाएं प्राप्त करके अपने देश भेजा करते थे। लेकिन यह काम बहुत खतरनाक था, जो भी जासूस पकड़ा गया उसकी सजा एक ही होती थी, मौत। दुनिया में कई देशों की जासूसी ऐजेंसियां काम कर रही हैं उनमें प्रमुख अमेरिकी की CIA, रूस की KGB, इजराइल की Mossad, पाकिस्तान की ISI और भारत की RAW हैं। ये ऐजेंसियां इनकी जासूसी करती हैं–
  • आज के दौर में जासूसी का मतलब ही बदल गया है। आज सिर्फ सरकारें ही जासूसी नहीं कराती बल्कि पति या पत्नी की जासूसी, बच्चों की जासूसी, प्रेमी या प्रेमिका की जासूसी, कर्मचारी की जासूसी, घर में काम करने वाले नौकर की जासूसी, शादी के लिए लड़के या लड़की की जासूसी होने लगी है।

    जासूसी का पेशा कोई नया नहीं है। यह काम तो सदियों से चला आ रहा है। बस फर्क यह है कि हर दौर में जासूसी का तरीका बदलता रहा है. आज जासूसी के लिए नित नए तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। अब, जासूसी की दुनिया में नए-नए आयाम आ गए हैं। हमारी दुनिया में एक छिपी दुनिया भी है, अपराधों की, माफियाओं के शैतानी इरादों की, अंधेरे हैं, खौफ है और रहस्य में लिपटी हुई गुत्थियां है। लेकिन इनका मुकाबला करने वाली ताकतें भी हैं, जो छिपी दुनिया पर से पर्दे उठाती हैं, जान जोखिम में डालकर चालाक अपराधियों को बेनकाब करती हैं। हमेशा से यही होता आया है। लेकिन दुनिया बदल रही है तो अपराध के तौर तरीके भी बदले हैं। और इसी के साथ बदल रही है जासूसी की दुनिया। पहले जहां जान जोखिम में डालकर प्रेमिका, प्रेमी, दोस्त या विश्वास में लेकर, भिखारी, पागल बनकर जासूसी होती थी लेकिन अब ये गुजरे जमाने की बात हो गई है। अब जासूसी अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी से लैस है। बटन, पेन व घड़ी में छिप जाने वाले कैमरे जासूसी की राह आसान बना रहे हैं। लेकिन जितना अधिक टेक्नोलॉजी का विकास हुआ है उतना ही लोग इससे सचेत रहने लगे हैं। टोही विमान और जासूसी उपग्रहों से अमेरिका जैसे देश दूसरे देशों पर निगाह रखते हैं।

  • अब सेल फोन से भी जासूसी होने लगी है। जासूसी सॉफ्टवेयर सेल फोन में लग जाता है फिर जहां भी आप जाते हैं या जिसकी जासूसी करनी हो उसकी गुप्त सूचनाएं सेल फोन पर निरंतर मिलती रहती हैं। इसका प्रयोग सर्वाधिक विदेशों में हो रहा है लेकिन विगत तीन-चार सालों से भारत में भी सेल फोन के जारिए जासूसी के मामले सामने आए हैं।
  • 2005 में अमर सिंह की फोन टेपिंग के बाद कई राजनेताओं ने आरोप लगाया था कि उनके भी फोन टेप हो रहे हैं…  केन्द्रीय कृषिमंत्री शरद पवारकांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंहबिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमारमाकपा महासचिव प्रकाश करात प्रमुख हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बेनर्जी भी कई बार सरकार पर फोन टेपिंग के आरोप लगा चुकी हैं।

    इस साल 2013 में अरुण जेटली के अलावा बीजेपी नेता नितिन गडकरीविजय गोयलसुधांशु मित्तल के काल डिटेल निकालने का मामला सामने आया है।    

  • आईफोन में आप जिन एप्लीकेशंस का इस्तेमाल करते हैं वे चुपके-चुपके आपकी जासूसी भी कर सकती हैं। एक नए अध्ययन में पता चला है कि स्मार्टफोन्स के आधे से ज्यादा प्रोग्राम और गेम्स एक बार डाउनलोड होने बाद निजी कम्पनियों को दोबारा डाटा भेज सकते हैं। अध्ययन में 101 एप्लीकेशंस शामिल किए गए, जिसमें देखा गया कि उनमें से 56 किसी न किसी तरह से एक निजी कम्पनी को फोन का नंबर उपलब्ध करा देते हैं। इस प्रक्रिया को युनिक डिवाइस आईडेंटीफायर या यूडीआईडी कहते हैं। समाचार पत्र डेली मेल के मुताबिक करीब 47 एप्लीकेशन फोन के स्थान के बारे में जानकारी दे देती हैं जबकि पांच एप्लीकेशन उसे इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति की उम्र, लिंग व अन्य निजी जानकारियां उपलब्ध करा देती हैं। इन एप्लीकेशंस में लोकप्रिय एंग्री बर्ड्स गेम और म्युजिक सॉफ्टवेयर शैजैम शामिल हैं। प्रत्येक आईफोन में ये दोनों एप्लीकेशन पहले से ही होती हैं। यह अध्ययन अमेरिका में हुआ था। वाल स्ट्रीट जर्नल द्वारा किए गए इस शोध में कहा गया है कि आईफोन को इस्तेमाल करने वाला किसी भी तरह से इस जासूसी को रोक नहीं सकता है।
  • सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों से जुड़े अभिभावकों में से आधे से ज्यादा इनका इस्तेमाल सिर्फ अपने बच्चों की जासूसी के लिए करते हैं। एक नए अध्ययन में इसका खुलासा हुआ है। समाचार पत्र डेली मेल के मुताबिक ब्रिटेन में करीब 55 प्रतिशत मां एवं पिता अपने बच्चों के फेसबुक प्रोफाइल में यह जानने के लिए ताक-झांक करते हैं कि वे क्या कर रहे हैं। आंकड़ें इक_ा करने वाली कम्पनी बुलगार्ड इंटरनेट सिक्युरिटी द्वारा किए गए इस अध्ययन में खुलासा हुआ है कि अभिभावक अपने बच्चों के साथ तनाव पैदा करने वाली बातचीत से बचने के लिए ऐसा करते हैं। करीब एक चौथाई अभिभावक स्वीकार करते हैं कि यह उनका अपने बच्चों के जीवन पर नजर रखने का अकेला तरीका है।
  • वॉइसमेल हैकिंग

     

    • मोबाइल फोन हैकिंग आमतौर पर दो तरह की होती है। एक वॉइसमेल हैकिंग और दूसरी डाटा हैकिंग। वॉइसमेल हैकिंग में कोई व्यक्ति दूर बैठकर आपके फोन के वॉइसमेल संदेशों को सुन सकता है।

    डाटा हैकिंग

     

    • इसमें कोई व्यक्ति आपके फोन (या कंप्यूटर आधारित बैकअप से भी) फोन नंबर, बैंक अकाउंट का विवरण और ईमेल आदि देख या चुरा सकता है। मोबाइल फोन हैकिंग में सबसे ज्यादा निशाने पर विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियां होती हैं, क्योंकि आमतौर पर इनकी सूचनाओं को अखबारों को अच्छी कीमत पर बेच सकते हैं। न्यूज ऑफ द वल्र्ड अखबार ने तो पुलिस के मुताबिक अपने ही जासूस फोन हैकिंग में लगा रखे थे।

    वॉइसमेल हैकिंग का तरीका

     

    • वॉइसमेल हैकिंग आमतौर पर उस सिस्टम के जरिए की जाती है जिसके जरिए आप अपने मैसेज सुनते हैं। जब आप घर से बाहर होते हैं और फोन साथ नहीं होता है तो आप इस सिस्टम के जरिए अपने वॉइसमेल सुनते हैं। यह सामान्य रूप से लैंडलाइन नंबर के जरिए होता है। इसमें आपको अपना मैसेज सुनने के लिए एक सिक्योरिटी पिन नंबर डालना होता है। हालांकि ज्यादातर लोग अपना पिन कभी नहीं बदलते और इसे सामान्य रूप से 1234 या फिर 0000 जैसा आसान पिन रखते हैं। यदि आप अपना पिन नहीं बदलते हैं तो फोन हैकर डिफाल्ट पिन डालकर आपका वॉइसमेल सुन सकता है। कल्पना कीजिए आपका नया पिन चार अंकों का है तो फोन हैकर के पास 10,000 संभावित विकल्प हैं आपके पिन का अंदाजा लगाने के लिए। यह पूरी तरह सफल नहीं हो पाएगा, लेकिन काफी ज्यादा संभावनाएं इस बात की हो सकती हैं।मंत्रालयों की जासूसी करना आसान नहीं

       

      • सरकार के गोपनीय मामलों में सेंध लगने और जासूसी का डर नया नहीं है और कई खास एजेंसियां ऐसी आशंका के मद्देनजर गैरजरूरी और अवांछित चीजों की जांच करने में लगी हुई हैं। जून 2011 में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने अपने दफ्तर और सलाहकार ओमिता पॉल के दफ्तर में फोन या बातचीत टैपिंग की आशंका के मद्देनजर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखा था। इसी पत्र के संदर्भ से यह अंदाजा लगा कि सभी प्रमुख मंत्रालयों में आवाज टैप करने के उपकरणों की रोजाना आधार पर जांच की जाती है। कुछ संवदेनशील विभागों में ऐसे उपकरणों की रोजाना दो बार जांच की जाती है ताकि सरकारी सूचनाओं की गोपनीयता सुनिश्चित की जा सके।
      • देश की राजधानी में रायसीना हिल के दोनों तरफ मौजूद कुछ महत्वपूर्ण दफ्तरों और कमरों की रोज सुबह और शाम जांच की जाती है। साउथ ब्लॉक जहां प्रधानमंत्री का दफ्तर, विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय है वहां भी रोजाना ऐसी जांच कराई जाती है। वहीं नॉर्थ ब्लॉक में मौजूद वित्त मंत्रालय और गृह मंत्रालय में भी ऐसे उपकरणों की आशंका के मद्देनजर ऐहतियात के तौर पर नियमित रूप से जांच होती है।
      • मंत्रियों के दफ्तर के अलावा सचिवालय और कुछ दूसरे वरिष्ठï अधिकारियों को भी जांच के दायरे में लाया जाता है। कुछ महत्वपूर्ण विभागों के मीटिंग रूम और कॉन्फ्रेंस क्षेत्र में भी खुफिया तरीके से टैप करने वाले उपकरणों की अक्सर जांच कराई जाती है।
      • दूसरे मंत्रालयों और सरकारी विभागों में ऐसी जांच जरूरत के लिहाज से होती है क्योंकि यह जरूरी नहीं होता कि उनके पास सरकारी गोपनीय सूचनाएं हों। वित्त मंत्रालय जिसकी टैपिंग से जुड़ा मामला चल रहा है, में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मसलन बजट पत्र, दूसरे विभागों और क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचनाएं होती हैं। सप्ताहांत के दौरान कई संवेदनशील दफ्तरों के कंप्यूटर और हार्ड ड्राइव की जांच भी कराई जाती है। इस जांच की जिम्मेदारी खुफिया ब्यूरो (आईबी) को दी जाती है और हर मंत्रालय के लिए सुरक्षा अधिकारी नियुक्त किए जाते हैं। मंत्रालय के एक वरिष्ठï अधिकारी जो संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी भी होते हैं वह नियमित जांच पर निगाह रखने वाले मुख्य अधिकारी की भूमिका निभाते हैं। 

        जासूसी पर कड़ा प्रावधान

         

         

        सरकार एक नया कानून बना रही है जिसमें अवैध तरीके से फोन टैप करने तथा उसकी सामग्री सार्वजनिक किये जाने के मामले में संबंधित दूरसंचार कंपनियों का लाइसेंस समाप्त किए जाने समेत कड़ी सजा का प्रावधान है। निजता अधिकार विधेयक में सभी प्रावधानों को लागू करने तथा आंकड़ा सुरक्षा नियमों के कथित उल्लंघन मामले की शिकायत प्राप्त करने एवं उसकी जांच करने के लिये भारतीय आंकड़ा सुरक्षा प्राधिकरण डीपीएआई स्थापित करने का प्रस्ताव है। विधेयक में सरकारी अधिकारियों को भी इसमें शामिल करने का प्रस्ताव है। इसमें प्रावधान है कि कोई भी विभाग अगर प्राप्त आंकड़ा या जानकारी सार्वजनिक करता पाया जाता है तो उस विभाग के प्रमुख को कड़ी सजा दी जाएगी। अवैध तरीके से जासूसी या बातचीत टेप करने का दोषी पाए जाने पर व्यक्ति को पांच साल तक की सजा तथा एक लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। कोई भी व्यक्ति किसी के टैप किए गए फोन या निजी सूचना को सार्वजनिक करने का दोषी पाया जाता है तो उसे तीन साल की जेल एवं 50,000 रुपये तक का जुर्माने की सजा दी जा सकती है। डीपीएआई डेटा सुरक्षा में सेंध मामले की जांच करेगा तथा प्रभावित व्यक्तियों के हितों की रक्षा के लिए जरूरत के मुताबिक उचित आदेश जारी करेगा। विधेयक के मुताबिक डीपीएआई में एक अध्यक्ष तथा दो सदस्य होंगे जिनके पास डेटा की सुरक्षा, उद्योग, वित्त, कानून प्रबंधन तथा उपभोक्ता मामलों के बारे में विशेष ज्ञान तथा पेशेवर अनुभव होगा। इनका चयन सरकार करेगी। अध्यक्ष तथा उसके सदस्यों का कार्यकाल तीन साल या 65 वर्ष की उम्र, इसमें से जो भी पहले हो, तक होगा। विधेयक में सेवानिवृत्ति के बाद इनकी किसी भी पद पर नियुक्ति पर प्रतिबंध लगाया गया है।

       

     

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