मुंबई : भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह द्वारा शुक्रवार को विपक्षी एकजुटता के प्रयासों पर कटाक्ष करते हुए दिए गए बयान को कांग्रेस ने हाथों हाथ लेते हुए इसका विरोध जताया है। शाह ने कहा था कहा कि अलग-अलग विचारधारा वाले सभी दल भाजपा के डर से एक साथ आने को मजबूर हो रहे हैं।

भाजपा के 38वें स्थापना दिवस पर अमित शाह पार्टी के बूथ कार्यकर्ताओं की विशाल रैली को संबोधित कर रहे थे। इसमें महाराष्ट्र के पांच लाख कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। अमित शाह ने कहा कि जिस प्रकार भीषण बाढ़ की स्थिति में सांप, नेवले, कुत्ते और बिल्ली जैसे विपरीत प्रकृति के जानवर भी एक ही वटवृक्ष पर शरण लिए दिखाई देते हैं, वैसे ही विपक्षी पार्टियां भी मोदी की बाढ़ को देख साथ आ रही हैं।

हालांकि, रैली के बाद प्रेस कांफ्रेंस में अपने कथन को स्पष्ट करते हुए अमित शाह ने कहा कि यदि किसी को ये उपमाएं खराब लगी हों तो वे समझ लें कि उन्होंने ऐसा कहकर वैचारिक भिन्नता वाले दलों के एक साथ आने की ओर इशारा किया है। जैसे सपा-बसपा और कांग्रेस-तृणमूल कांग्रेस या कांग्रेस और तेलुगु देसम पार्टी जैसे दल एक-दूसरे के धुर वैचारिक विरोधी हैं, फिर भी भाजपा के डर से एक साथ आने पर विचार कर रहे हैं।

लेकिन उनकी सफाई से कांग्रेस संतुष्य नहीं है और जानवरों से तुलना करने पर मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष संजय निरूपम ने कहा, “लोकतंत्र में इतना भी नीचे नहीं गिरना चाहिए कि भाषा असंसदीय हो जाए। वहीं कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि शाह का बयान उनकी मानसिकता दिखाता है।

शर्मा ने कहा कि वो बार-बार राजनीतिक चर्चा को निचले स्तर पर ले गए हैं जो शर्मनाक है। हम उनसे उम्मीद भी क्या कर सकते हैं, यह उनके डीएनए में है। वहीं रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि हमारी संस्कृति में किसी इंसान का कैरेक्टर उसके द्वारा कहे जाने वाल वाक्यांशों से समझा जाता है। जिस तर अमित शाह ने विपक्ष के लिए अपशब्दों का प्रयोग किया है, यह बताता है कि उन्होंने लड़ाई शुरू होने से पहले ही हार मान ली है।

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