खास रिपोर्ट /शादाब रिजवी
मेरठ : पश्चिमी यूपी के मेरठ जिले के शोभापुर गांव में गम और गुस्सा सोमवार को भी बरकरार दिखा। 2 अप्रैल की हिंसा के आरोप में दलितों के नाम की लिस्ट और 3 अप्रैल को गांव में एक दलित गोपी पारिया की हत्या होने से दलित समाज खफा है। गांव के दलितों ने धमकी दी है कि न्याय न मिलने की स्थिति में वे धर्म परिवर्तन करके इस्लाम अपना लेंगे। यही नहीं उन्होंने स्थाई रूप से पलायन की भी चेतावनी दी है।

जानकारी के मुताबिक, काफी लोगों ने गांव से पलायन कर भी दिया है और गांव की दलित बस्ती में सन्नाटा है। इसके अलावा गांव में एक दूसरी तस्वीर भी दिखती है। स्कूल में बच्चे सामान्य दिनों की तरह जा रहे हैं, लोग अपने काम में लगे हैं और पलायन की बात से इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि हिंसा के दौरान नाम आने और पुलिस कार्रवाई के डर से जरूर कुछ लोग गांव से बाहर चले गए हैं लेकिन अब गांव में पूरी तरह शांति है।

‘न्याय ना मिलने पर करेंगे धर्म परिवर्तन’
मारे गए गोपी के पिता ने सोमवार को बताया कि 2 अप्रैल की हिंसा में शोभापुर के लोग नहीं थे। उन्होंने कहा, ‘हम धरना दे रहे थे और 40-50 लोग थे लेकिन हिंसा फैलाने वाले सैकड़ों कहां से आ गए, इसकी जांच होनी चाहिए। पुलिस दबंगों की लिस्ट के आधार पर दलितों को आरोपी बना रही है। लिस्ट में पहला नाम मेरे बेटे गोपी का था और उसको मार डाला गया। पांचवें नंबर पर मेरे दूसरे बेटे का नाम था। मेरा और मेरी पत्नी का भी नाम उस लिस्ट में है। दबंग एक बेटे की हत्या करने के बाद अब और जान लेने की चेतावनी दे रहे हैं, हमारी मांग है कि हत्या के आरोपियों पर रासुका (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) लगे। अगर पुलिस उत्पीड़न का रवैया यही रहा, तो सभी दलितों ने तय किया है कि वे धर्म परिवर्तन करते हुए इस्लाम धर्म अपना लेंगे।’

भारत बंद के बाद से मेरठ का शोभापुर इलाका देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस गांव में पुलिस चौकी को आग लगा दी गई थी। जमकर हिंसा के साथ ही पथराव और तोड़फोड़ की गई थी। इसके बाद गांव के कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। गांव मे हिंसा फैलाने वालों के नामों की एक लिस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसमें सौ से ज्यादा दलितों के नाम थे, तो चार मुसलमानों के नाम भी दर्ज थे। विवाद जब बढ़ा तो इस लिस्ट में दर्ज पहले नाम गोपी पारिया का अगले दिन यानी 3 अप्रैल को गांव में सरेआम कत्ल कर दिया गया। कत्ल का इल्जाम गांव के दबंग गुर्जरों पर आया। इस मामले में चार लोग गिरफ्तार हुए और एक की तलाश है।

चर्चित लिस्ट में नाम आने और गोपी की हत्या के बाद गांव के दलितों में दहशत फैल गई। रविवार को पुलिस और दबंगों पर उत्पीड़न का आरोप लगाने वाले दलितों ने धर्म परिवर्तन करने की चेतावनी दी थी। साथ ही दावा किया था कि दलित गांव से पलायन कर रहे हैं। सोमवार को दलितों से गांव जाकर जब बात की गई, तो उन्होंने अब उत्पीड़न बंद नहीं होने पर धर्म परिवर्तन कर इस्लाम धर्म स्वीकार करने का ऐलान कर दिया।

गांव के एक और दलित दीपक कुमार का कहना है, ‘पुलिस के एलआईयू और इंटेलिजेंस फेल रहे। बाहरी उपद्रवियों को वह तलाश नहीं रहे हैं। गरीब मजदूर बेगुनाह दलितों को पकड़ने के लिए दबिश दे रहे हैं। गांव के लोग पलायन कर चुके हैं। गोपी की मौत के बाद कुछ बुजुर्ग जरूर गांव लौटे हैं। हमने पुलिस से साफ कह दिया है कि अगर उत्पीड़न बंद नहीं हुआ और बेगुनाह पकड़े नहीं गए तो गांव के दलित धर्म परिवर्तन कर इस्लाम धर्म स्वीकार कर लेंगे।’

शोभापुर के ही दलित मूलचंद का कहना है कि गांव के दलितों को हिंसा फैलाने के लिए बदनाम किया जा रहा है और पुलिस के उत्पीड़न से तंग आकर गांव से नौजवान पलायन कर गए हैं। अब उन्होंने पुलिस का रवैया देखकर तय किया है कि बदलाव नहीं आने पर धर्म परिवर्तन कर लेंगे। गांव की दो महिलाओं ने अपना नाम नहीं बताया लेकिन साफ कहा कि दलित समाज का उत्पीड़न किया जा रहा है, इसलिए हमारे मर्द घर से पलायन कर गए। हम भी धर्म परिवर्तन कर इस्लाम धर्म स्वीकार कर लेंगे।

गैर दलित बस्ती का रुख

इसके उलट दलितों की बस्ती के अलावा गांव के दूसरे इलाके में लोग सामान्य तौर पर रह रहे हैं, वहां दुकानें खुली हैं। घर पर किसानों का काम करने वाले लुहार भी काम में जुटे हैं। स्कूल जाने के लिए बच्चे घरों से निकल रहे हैं। इस इलाके में नहीं लगता कि गांव मे कोई विवाद या तनाव है। इस बस्ती के दीप सिंह का कहना है कि गांव में 2 अप्रैल को हिंसा और 3 को गोपी की हत्या के चलते जरूर तनाव था। उसके बाद दलित बस्ती में सूनापन है लेकिन यहां पर कोई विवाद नहीं है, सब सामान्य काम हो रहे हैं।

इसी बस्ती के बालकिशन का कहना, ‘गांव में सब सही चल रहा है, जो जैसा करेगा वैसा भरेगा और पलायन की बातें झूठी हैं। पुलिस रेकॉर्ड में नाम आने की वजह से दलित युवक गांव से भागे हुए हैं, बाकी लोग गांव में ही हैं। महिलाएं-बच्चे सब रह रहे हैं, पुलिस भी गांव में लगी है, फिर किस बात का डर है? गांव में 3 अप्रैल के बाद पूरी तरह शांति है।’ इसी गांव के ओमवीर सिंह का कहना है कि 2 अप्रैल को अराजकता का माहौल गांव में था।

एसएसपी बोलीं- कोई पलायन नहीं
मेरठ की एसएसपी मंजिल सैनी ने शोभापुर से दलितों के पलायन के आरोप पर साफ कहा, ‘कोई भी पलायन गांव से नहीं हुआ है और मेरे पास कोई शिकायत नहीं है। गांव में पर्याप्त सुरक्षा है, किसी का उत्पीड़न नहीं किया जा रहा है। जांच के बाद ही सबूत के तौर पर गिरफ्तारी की जाएगी। हम लोग गांव में जाकर दलितों से मिल चुके हैं। किसी ने पलायन की शिकायत नहीं की।’ उन्होंने भरोसा दिया कि किसी निर्दोष को परेशान नहीं किया जाएगा। दोषियों के खिलाफ ही कार्रवाई होगी।

navbharattimes.indiatimes.com से साभार
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