ग्राम पंचायत भवन बन्दौरा

कवर्धा: समीपस्थ ग्राम पंचायत बंदोरा में भ्रष्ट्राचार चरम सीमा पर पहुंच चुका है। ग्रामीणों द्वारा इसकी सबूत सहित शिकायत को भी अधिकारियों ने कुड़े में डाल दिया और भ्रष्ट्राचार अनियमितता को भूल बता कर भ्रष्ट्राचार को संरक्षण दे रहे हैं। प्रशासन के इस हरकत से ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश व्याप्त है।

सी ई ओ जनपद पंचायत

इस संबंध में शिकायतकर्ता ग्रामीणों ने बताया कि सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी से पता चला कि ग्राम पंचायत बंदौरा में सरपंच सचिव मिलकर लाखों रू. का भ्रष्ट्राचार कर चुके है । इसमें तकनीकी सहायक की भूमिका भी संदिग्ध है। पूर्व मंत्री मो. अकबर द्वारा भी इस मामले में ग्रामीणों को साथ देते हुए छ.ग. शासन के मुख्यसचिव को पत्र लिखकर जांच कार्यवाही की मांग की थी जिस पर मुख्यसचिव द्वारा जिला कलेक्टर को जांच कार्यवाही का निर्देश दिया गया था। इसके बाद भी जनपद सीईओ एवं अन्य अधिकारियों के संरक्षण में भ्रष्ट्राचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। शिकायतकर्ता ग्रामीण भागवत कौशिक ने बताया कि भ्रष्ट्राचार की शिकायत शासन प्रशासन सहित मुख्यमंत्री निवास, विधायक अशोक साहू को भी किया गया है किंतु जांच कार्यवाही में धांधली नही रूकी। उन्होने सीईओ जनपद पंचायत कवर्धा,जांच अधिकारी मनोज सोनी ,यादोराम साहू व तकनीक सहायक गेंदलाल डडसेना पर लेनदेन करके जांच में धांधली का आरोप लगाया ।

सचिव ग्राम पंचायत बन्दौरा

 

इस संबंध में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत बंदौरा में स्वच्छ भारत मिशन में जमकर भ्रष्ट्राचार किया गया है। उक्त भ्रष्ट्राचार की शिकायत विभिन्न 23 बिन्दुओं में करके शासन प्रशासन से जांच की मांग की गई थी जिसकी जांच में जांच अधिकारी मनोज सोनी व यादोराम साहू द्वारा पक्षपात कर बिन्दुवार जांच नही किया गया। सरपंच सचिव द्वारा शिकायत कर्ताओ को द्वेषवश शिकायत करने की बात कहकर जांच को प्रभावित किया गया। जो कि सत्य नही है। सरपंच सचिव मिलकर फर्जी बिल वाउचर से लाखो रू. का घोटाला किये है। मृतक के नाम पर शौचालय बनाया गया है इसके अलावा जो लोग गांव में नही है पलायन कर गये हैं उनके नाम पर शौचालय बनाया जाना दर्शाकर भ्रष्ट्राचार किया गया है। इसके अलावा कई कार्यो में मटेरियल सप्लायर सरपंच का पुत्र ही है जो कि फर्जी है। सरपंच द्वारा 544825.00 रू. का सिमेंट खरीदना दर्शाया गया है जिसे जांच अधिकारी ने महज भूल मान कर क्लीन चिट देदी। इसी तरह बिल वाउचर में कई फर्जीवाड़ा किया गया है किसी में सरपंच का हस्ताक्षर नही तो किसी में सचिव का हस्ताक्षर नही और तो और सप्लायर भी फर्जी । इस मामले में स्पष्ट भ्रष्ट्राचार होने के बाद भी जांच में धांधली किया गया है जो कि गलत है। ग्रामीणों ने शासन प्रशासन से शीघ्र निष्पक्ष जांच कार्यवाही की मांग करते हुए भ्रष्ट्राचार को संरक्षण देने वाले जनपद सीईओ, जांच अधिकारी मनोज सोनी व यादोराम साहू , तकनीक सहायक डडसेना सहित सरपंच सचिव व अन्य पर कार्यवाही की मांग की है।

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