खास रिपोर्ट /शारिब जाफरी 

लखनऊ : झांसी के मऊरानीपुर थाने के इंस्पेक्टर सुनीत कुमार सिंह को शासन ने नौकरी से निकाल दिया है। वैसे, वो पहले भी एक बार नौकरी से बर्खास्त किया जा चुका है, लेकिन तब हाईकोर्ट से अपनी बहाली कराकर लौट आया था। ये एक ऐसा थानेदार रहा जिसे दागदार होने के बावजूद एक एसपी ने थाने का चार्ज दिया और लंबे समय तक जोन, रेंज के आईजी-डीआईजी से लेकर कर डीजीपी कार्यालय तक सब आंख-कान बंद किए रहे। यही नहीं, गृह विभाग ने एïेसे थानेदार को उसके सभी जुर्मों में क्लीन चिट दे दी। अब एक ऑडियो क्लिप पब्लिक के सामने आने पर ये थानेदार फिर बर्खास्त किया गया है। बहरहाल, सुनीत कुमार सिंह तो उत्तर प्रदेश पुलिस की एक बानगी भर है। इसके जैसे ढेरों दरोगा, सिपाही वगैरह हैं जो शासन-नेताओं की सरपरस्ती में मजे से नौकरी कर रहे हैं। ढेरों पुलिसकर्मी सस्पेंड और बखार्ïस्त होते हैं और चुटकियों में बहाल होकर सीना तानकर फिर कारनामे करते रहते हैं।

सुनीत कुमार सिंह का केस बयां करता है तस्वीर :

इस इंस्पेक्टर पर गृह विभाग में तैनात सबसे बड़े अफसर का वरदहस्त था। यही वजह थी कि 2007 से 2015 तक हत्या, अप्राकृतिक यौन शोषण, अपराधियों को छोडऩे जैसे संगीन आरोपों के बावजूद 2017 में सिर्फ एक मजमून के जरिये सुनीत कुमार सिंह को सभी मामलों में न सिर्फ क्लीनचिट दे दी गई बल्कि बर्खास्तगी के बाद उसे न सिर्फ सेवा में भी ले लिया गया बल्कि थाने का इंचार्ज बना दिया गया।

 सुनीत कुमार सिंह 2001 में सीधे पुलिस सब इंस्पेकटर के पद पर भर्ती हुआ। छोटे मोटे अपराधों में संलिप्तता के बीच सुनीत सिंह का पहला बड़ा कारनामा वर्ष 2007 में सामने आया जब अपराधियों को गिरफ्तार करने के बहाने सुनीत सिंह कोलकाता पहुंच गया। वहां एक डांस बार में इस ने खूब ऊधम मचाया। स्थिति कुछ ऐसी बनी कि लोगों ने सुनीत सिंह को घेर लिया। जिसके बाद सुनीत ने वहां अंधाधुंध फायरिंग कर दी। स्थानीय पुलिस ने सुनीत सिंह व दो अन्य साथियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की और सुनीत की निशानदेही पर उसके कब्जे से चोरी की एक इंडिका कार बरामद की और सुनीत सिंह को चोरी के इलजाम में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। सुनीत सिंह चार महीने से ज्यादा जेल में रहा। इसके बाद तत्कालीन पुलिस महानिदेशक बुआ सिंह के निर्देश पर 25 अगस्त 2007 को सुनीत सिंह को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया।

बर्खास्तगी के आदेश के विरोध में सुनीत सिंह कोर्ट चला गया और अदालत के आदेश पर बहाल हो गया। इसके बाद सुनीत को कानपुर जोन के झांसी रेंज में तैनाती मिली और जालौन जिला एलॉट किया गया। जालौन में सुनीत सिंह के विरुद्ध थाना सिरसाकलार में दफा 302/201 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद वर्ष 2010 में सुनीत कुमार सिंह के खिलाफ सिरसाकलार थाने में एक दलित महिला के साथ अप्राकृतिक यौन शोषण का आरोप लगा। इस मामले में दफा 377 व 3 (2) 5 एससी/एसटी एक्ट के तहत उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया। इस मामले में 26 अप्रैल 2015 को सुनीत सिंह बरी कर दिया गया।

गृह सचिव ने दी थी क्लीन चिट

अखिलेश यादव सरकार में मणि प्रसाद मिश्रा गृह सचिव थे और योगी राज में भी बने रहे। सपा शासनकाल में दो बार सेवा विस्तार पाने वाले मणि प्रसाद मिश्रा को योगी राज में भी तीन माह का सेवा विस्तार मिला। दस्तावेज बताते हैं कि मणि प्रसाद मिश्रा के हस्ताक्षर से 5 मई 2017 को गृह पुलिस अनुभाग-1 के पत्र संख्या डब्लू-1148 / 06-2-1-17 – 650 (94) / 2016 के आदेश के जरिये सुनीत सिंह को सभी गुनाहों में क्लीन चिट दे दी गयी। इस आदेश में सिरसाकलार थाने में दर्ज अप्राकृतिक यौन शोषण और हत्या जैसे मामलों में मिली सजा भी इसी एक आर्डर के जरिये माफ हो गई। वर्ष 2015 के दंडादेश संख्या द-8 / 15, वर्ष 2013 के दंडादेश संख्या द-4 /15, वर्ष 2014 के दंडादेश संख्या द 69/14, वर्ष 2013 के दंडादेश संख्या 3 /14, वर्ष 2012 के दंडादेश संख्या 34 / 12, वर्ष 2012 के दंडादेश संख्या 21/12, वर्ष 2010 के दंडादेश संख्या द-93 /10, वर्ष 2009 के दंडादेश संख्या द 34/10 की सजा को एक झटके में ही खत्म कर दिया गया।

अब कैसे फंसा सुनीत कुमार सिंह

दरअसल एक ऑडियो वायरल हुआ जिसमें सुनीत कुमार सिंह और जिले के शातिर अपराधी लेखराज सिंह के बीच हुई बातचीत रिकॉर्ड है। इस क्लिप में इंस्पेक्टर अपराधी को भाजपा के जिलाध्यक्ष और विधायक से मामला ‘मैनेज’ करने की सलाह देता सुना जा सकता है। ऑडियो क्लिप में इंस्पेक्टर खुद को भी पुराना अपराधी बता रहा है। 8 मिनट 33 सेकेंड की इस क्लिप में अपराधी कोतवाल को यार जबकि कोतवाल अपराधी को सर कहकर सम्बोधित कर रहा है।

तत्कालीन गृह सचिव मणि प्रसाद को कुछ याद नहीं

इंस्पेक्टर सुनीत कुमार सिंह को क्लीन चिट देने वाले तत्कालीन गृह सचिव मणि प्रसाद मिश्रा अब रिटायर हो चुके हैं। इस प्रकरण के बारे में पूछने पर मिश्रा कहते हैं कि उन्हें इस मामले में फिलहाल कुछ याद नहीं है। उन्होंने ये भी कहा कि पत्रावली पर जो सही था उसी के अनुसार निर्णय लिया गया होगा।

अब किसी दागी को थाना नहीं देंगे : डीजीपी

डीजीपी ओपी सिंह का कहना है कि आरोपी इंस्पेक्टर की करतूत सामने आने के बाद उसे बर्खास्त कर दिया गया है और सभी जिलों के पुलिस कप्तानों को साफ कह दिया गया है कि किसी भी दागी को किसी भी कीमत पर थानेदार नहीं बनाया जाए। साफ सुथरी छवि और अच्छी पुलिसिंग करने वालों को ही थानों का इंचार्ज बनाए जाने का स्पष्ट आदेश दिया गया है।

सजा माफ होने से बन गया कोतवाल

सुनीत सिंह सपा शासनकाल में भी झांसी रेंज में ही पोस्ट था। सत्ता परिवर्तन के बाद तत्कालीन एसएसपी झांसी जे के शुक्ला ने उसे थाने इंचार्ज बना दिया था। सारी सजा (मिसकन्डक्ट) खत्म किए जाने की वजह से सुनीत सिंह प्रमोशन हासिल कर कोतवाल बनने में भी सफल हो गया।

इस बार प्रभावी पैरवी का निर्देश : डीआईजी प्रवीण कुमार

सुनीत कुमार सिंह इस बार फिर कोर्ट का सहारा लेकर बहाल नहीं होगा इसकी क्या गारंटी है? इस सवाल पर डीआईजी कानून व्यवस्था प्रवीण कुमार कहते हैं कि अगर सुनीत सिंह अदालत जाता है तो इस बार पुलिस मजबूती से अपना पक्ष रखेगी। 2007 में बर्खास्तगी के बाद अदालत में लचर पैरवी के चलते सुनीत को राहत मिली होगी, लेकिन इस बार स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि अदालत में प्रभावी पैरवी की जाए। उन्होंने बताया कि सुनीत ने जो फर्जी मुकदमे दर्ज किए हैं उनकी जांच चल रही है। प्रवीण कुमार ने बताया कि इस बिन्दु पर भी जांच हो रही है कि किस आधार पर बिना कैरेक्टर रोल देखे सुनीत सिंह को इंचार्ज बनाया गया। उन्होंने बताया कि पूरे मामले की जांच सीनियर आफीसर से कराए जाने का निर्णय हुआ है और जिसकी लापरवाही सामने आएगी उसे बख्शा नहीं जाएगा।

Newstrack Hindi से साभार
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