मोदी सरकार आधार को लेकर एक बार फिर बैकफुट पर नज़र आ रही है। मोदी सरकार आधार कार्ड से मोबाइल नंबर लिंक के लिए अब झूठ भी बोल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा है कि कोर्ट ने कभी आधार को मोबाइल से जोड़ने का आदेश नहीं दिया। फिर ये क्यों ये कहा जा रहे है कि ये कोर्ट का आदेश है?

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पूछा कि कोर्ट ने आधार को सिम से जोड़ने का कोई आदेश जारी नहीं किया लेकिन सर्कुलर में क्यों कहा गया कि कोर्ट का आदेश है ?

दरअसल, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यू.आई.डी.ए.आई)की ओर से कहा गया कि ये मार्च 2017 का सुप्रीम कोर्ट का आदेश था।

गौतलब है कि पिछले काफी समय से बैंकिंग से लेकर तमाम सेक्टर्स की तरफ से उपभोक्ताओं पर आधार से मोबाइल नंबरों को जोड़ने का दबाव बनाने की बात सामने आई है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को काफी अहम माना जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकार ने 6 फरवरी 2017 को दिए गए उसके आदेश की गलत व्याख्या की है। संवैधानिक पीठ ने कहा, ‘असल में उच्चतम न्यायालय ने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया लेकिन आपने इसे मोबाइल उपयोगकर्ताओं के लिए आधार अनिवार्य करने के लिए औजार के रूप में प्रयोग किया।’

संवैधानिक पीठ में मुख्य न्यायाधीश के अलावा जस्टिस एके सिकरी, जस्टिस एएन खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एके भूषण शामिल हैं।

 

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