मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार पांडेय ने बीबीसी को बताया, “पुलिस को जानकारी मिली थी कि सचिन वालिया की मौत के बाद कुछ लोग राजपूत समुदाय से बदला लेने की फ़िराक़ में हैं.

इसे देखते हुए साइबर सेल और पुलिस की एक संयुक्त टीम गठित की गई और कई नंबरों को सर्विलांस पर लगाया गया और उसी के बाद इन लोगों की गिरफ़्तारी की गई.”

 

इंसाफ़ के लिए पक्ष में आये लोगइमेज कॉपीरइटSAMIRATMAJ MISHRA/BBC

पुलिस ने इनके कब्ज़े से सात मोबाइल फ़ोन भी बरामद किए हैं. पुलिस के मुताबिक गिरफ़्तार किए गए लोगों की मोबाइल कॉल, वाट्सऐप और मेसेंजर चैटिंग में मेरठ और सहारनपुर में हिंसा भड़काने की साजिश का पता चला.

पुलिस की मानें तो ये सभी छह लोग क़रीब 24 वाट्सऐप ग्रुप के ज़रिए तमाम लोगों को अपनी मुहिम से जोड़ रहे थे. गिरफ़्तार किए गए सभी लोग दलित समुदाय से हैं और भीम आर्मी से जुड़े हुए हैं.

पिछले हफ़्ते भीम आर्मी के ज़िलाध्यक्ष कमल वालिया के भाई सचिन वालिया की हत्या के बाद से ही ऐसी आशंका जताई जा रही थी कि माहौल शांत भले ही दिख रहा हो, लेकिन दलित समुदाय में इस हत्या को लेकर बेहद नाराज़गी है.

रिपोर्ट दर्ज़ पर गिरफ़्तारी नही

वहीं दूसरी ओर, सचिन वालिया की मौत का रहस्य अभी भी बरकरार है. पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस सचिन की हत्या को ‘एक्सीडेंटल मौत’ साबित करने की कोशिश में लगी है जबकि साफ़तौर पर उसकी हत्या हुई है.

सचिन के भाई कमल वालिया ने बीबीसी से बातचीत में पुलिस और प्रशासन पर आरोप लगाया कि उनके भाई की हत्या में उल्टे उन्हीं लोगों को फँसाने की साज़िश की जा रही है.

कमल वालिया का कहना था, “हमने जिन लोगों के ख़िलाफ़ सचिन वालिया की हत्या के लिए नामज़द रिपोर्ट लिखाई थी, उनकी गिरफ़्तारी अब तक नहीं हुई है, जबकि झूठे और मनगढ़ंत तरीके से भीम आर्मी के लोगों को गिरफ़्तार किया जा रहा है.”

 इस बीच, बताया जा रहा है कि सहारनपुर के रामनगर गांव में कमल वालिया के घर पर भीम आर्मी के सैकड़ों लोग रोज़ शोक जताने आ रहे हैं, जिसे देखते हुए पुलिस और प्रशासन काफ़ी सतर्क हो गया है.

इस बीच, ख़बर ये भी मिली की कुछ राजपूतों के घर के बाहर ‘जय भीम’ लिखा हुआ मिला. हालांकि पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है.

रामनगर गांव में भीम आर्मी के सदस्य सचिन वालिया की हत्या के आरोप में उनके परिवार की ओर से चार लोगों के ख़िलाफ़ नामज़द और कई अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ रिपोर्ट लिखाई गई थी लेकिन अभी तक उस मामले में कोई गिरफ़्तारी नहीं हुई है.

जिन लोगों को इस मामले में नामज़द किया गया था वो सभी सहारनपुर में महाराणा प्रताप जयंती के आयोजक मंडल में शामिल थे. 28 मई को कैराना लोकसभा सीट पर और नूरपुर विधान सभा सीट पर उपचुनाव होने हैं.

इसे लेकर प्रशासन काफी सतर्कता दिखा रहा है ताकि किसी तरह का जातीय संघर्ष न होने पाए. पिछले साल महाराणा प्रताप जयंती के मौके पर ही विवाद हुआ था जो बाद में दलितों और राजपूतों के बीच हिंसक संघर्ष में तब्दील हो गया था.

 www.bbc.com से साभार

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